आग बुझाने वाले ही उगलने लगे आग! घूरपुर में फायर कर्मियों पर महिलाओं के सामने गाली-गलौज का आरोप
रक्षक जब भक्षक बन जाएं तो जनता किससे लगाए गुहार?” वायरल वीडियो के बाद घूरपुर में मचा बवाल
घूरपुर, प्रयागराज। जिन कंधों पर लोगों की जान-माल बचाने की जिम्मेदारी हो, अगर वही वर्दीधारी मर्यादा की सीमाएं लांघने लगें तो सवाल केवल एक परिवार का नहीं, पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता का खड़ा होता है। यमुनानगर के घूरपुर थाना क्षेत्र स्थित बुंदावा गांव में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां फायर ब्रिगेड कर्मियों पर एक परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप केवल विवाद का नहीं, बल्कि महिलाओं और बच्चों के सामने खुलेआम गाली- गलौज, अभद्रता और भय का माहौल बनाने का है। बुंदावा गांव निवासी पारस पटेल पुत्र स्वर्गीय मुलई राम पटेल ने घूरपुर थाने में दी गई लिखित तहरीर में आरोप लगाया है कि पास स्थित फायर स्टेशन के कुछ कर्मचारी आए दिन गांव के पास वॉलीबॉल खेलते हैं। खेल के दौरान गेंद कई बार उनके घर के अंदर चली जाती थी। शुरुआत में परिवार ने इसे सामान्य घटना समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जब यह सिलसिला लगातार बढ़ा और घर की महिलाओं व बच्चों को परेशानी होने लगी तो पारस पटेल ने फायर कर्मियों से सावधानी बरतने की अपील की। आरोप है कि इतनी सी बात पर कुछ फायर कर्मी आगबबूला हो गए। पीड़ित परिवार का कहना है कि विरोध करने पर कर्मियों ने मर्यादा की सारी सीमाएं तोड़ दीं और मां-बहन की भद्दी गालियां देना शुरू कर दिया। परिवार का आरोप है कि महिलाओं के सामने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसने पूरे परिवार को मानसिक रूप से झकझोर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर आपदा के समय लोगों की सुरक्षा का दावा करने वाले विभाग के कर्मचारी ही आम नागरिकों के घर के बाहर इस तरह का व्यवहार करेंगे, तो जनता भरोसा आखिर किस पर करेगी? गांव में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है। पीड़ित पारस पटेल ने आरोप लगाया कि विवाद में विशाल यादव, संतोष समेत कुछ अन्य फायर कर्मी शामिल थे, जो अक्सर विवाद और दबंगई भरे व्यवहार के लिए चर्चाओं में रहते हैं। परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश की, लेकिन हर बार उन्हें अपमान और धमकियों का सामना करना पड़ा। घटना के कथित वीडियो भी अब गांव से निकलकर सोशल मीडिया तक पहुंच चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वीडियो में जिस तरह अभद्र भाषा का इस्तेमाल सुनाई दे रहा है, उसे देखकर कोई भी यह नहीं कह सकता कि महिलाओं का अपमान नहीं किया गया। वीडियो वायरल होने के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और लोग विभागीय अनुशासन पर सवाल उठा रहे हैं। मामले को लेकर पारस पटेल ने घूरपुर थाना पुलिस से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं गांव के कुछ संभ्रांत लोगों ने दोनों पक्षों को बैठाकर मामला शांत कराने की कोशिश की, लेकिन विवाद अब पुलिस तक पहुंच चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में विवाद और गंभीर रूप ले सकता है। फिलहाल पूरे इलाके में एक ही सवाल गूंज रहा है — “जब आग बुझाने वालों के भीतर ही इतनी आग भर जाए, तब आम आदमी आखिर कहां जाए?
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जी पी न्यूज़ इंडिया के लिए सोनू खान की रिपोर्ट
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