स्वच्छ भारत के दावों को पलीता? NDMC के शौचालय 10 बजे से पहले बंद, जनता में रोष
चौधरी अजयपाल सिंह की रिपोर्ट
एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर में "स्वच्छ भारत अभियान" को जन आंदोलन बनाने और नागरिकों को बेहतर स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) के अधीन संचालित कुछ सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
शिकायतों के अनुसार, PTU005/01 और PTU005/009 के अंतर्गत संचालित सार्वजनिक शौचालयों का निर्धारित समय रात 10:00 बजे तक है, लेकिन इन्हें अक्सर करीब 20 मिनट पहले ही बंद कर दिया जाता है। सवाल यह है कि जब सरकारी रिकॉर्ड में शौचालय 10 बजे तक खुले दिखाए जाते हैं, तो जनता को 9:40 बजे ही सुविधा से वंचित क्यों कर दिया जाता है?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जनता के टैक्स के पैसे से संचालित सुविधाओं पर कुछ कर्मचारियों की मनमानी हावी है। यदि संचालन का समय रात 10 बजे तक निर्धारित है, तो समय से पहले ताला लगाना केवल लापरवाही नहीं बल्कि जनता के अधिकारों की अनदेखी भी है।
कनॉट प्लेस और आसपास के क्षेत्रों में देर रात तक हजारों लोग मौजूद रहते हैं। ऐसे में सार्वजनिक शौचालयों को निर्धारित समय से पहले बंद करना महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, कर्मचारियों, डिलीवरी कर्मियों और यात्रियों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनता है। लोगों का कहना है कि स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर मूलभूत सुविधाएं भी तय समय तक उपलब्ध नहीं हैं।
नागरिकों का यह भी कहना है कि यदि प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत की बात कर रहे हैं, तो NDMC के अधिकारियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके अधीन चल रही सुविधाएं नियमों के अनुसार संचालित हों। अन्यथा स्वच्छ भारत अभियान केवल भाषणों, पोस्टरों और सरकारी विज्ञापनों तक सीमित होकर रह जाएगा।
अब मांग उठ रही है कि PTU005/01 और PTU005/009 से संबंधित पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। जनता का सवाल सीधा है—जब शौचालयों के लिए पैसा जनता दे रही है और समय रात 10 बजे तक निर्धारित है, तो फिर जनता को उसका अधिकार पूरे समय तक क्यों नहीं मिल रहा?


إرسال تعليق