सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्यपाल को सरकार बनाने के लिए सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को आमंत्रित करना होता है, और वह बहुमत जुटाने के तरीके की जांच नहीं कर सकता।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चुनावों के बाद सरकार बनाने के लिए सबसे बड़ी पार्टी या चुनाव के बाद बने गठबंधन को आमंत्रित करने के अलावा राज्यपाल के पास कोई और विकल्प नहीं होता और वह इस बात की जांच नहीं कर सकता कि सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन ने बहुमत का समर्थन कैसे जुटाया है।
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठों ने 1994 के ऐतिहासिक एस.आर. बोम्मई फैसले से लेकर 2006 के रामेश्वर प्रसाद फैसले तक लगातार यही व्यवस्था दी है।
फैसले में की गई यूपीए सरकार की कड़ी आलोचना
रामेश्वर प्रसाद फैसले में यूपीए सरकार की कड़ी आलोचना की गई थी। यह आलोचना बिहार विधानसभा को भंग करने और राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए की गई थी। यह फैसला तत्कालीन राज्यपाल बूटा सिंह की उस रिपोर्ट पर आधारित था, जिसमें कहा गया था कि जेडीयू और बीजेपी के बीच चुनाव-पूर्व कोई गठबंधन नहीं था और उनका एक साथ आना विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) की बू देता था।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चुनावों के बाद सरकार बनाने के लिए सबसे बड़ी पार्टी या चुनाव के बाद बने गठबंधन को आमंत्रित करने के अलावा राज्यपाल के पास कोई और विकल्प नहीं होता और वह इस बात की जांच नहीं कर सकता कि सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन ने बहुमत का समर्थन कैसे जुटाया है।
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठों ने 1994 के ऐतिहासिक एस.आर. बोम्मई फैसले से लेकर 2006 के रामेश्वर प्रसाद फैसले तक लगातार यही व्यवस्था दी है।
फैसले में की गई यूपीए सरकार की कड़ी आलोचना
रामेश्वर प्रसाद फैसले में यूपीए सरकार की कड़ी आलोचना की गई थी। यह आलोचना बिहार विधानसभा को भंग करने और राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए की गई थी। यह फैसला तत्कालीन राज्यपाल बूटा सिंह की उस रिपोर्ट पर आधारित था, जिसमें कहा गया था कि जेडीयू और बीजेपी के बीच चुनाव-पूर्व कोई गठबंधन नहीं था और उनका एक साथ आना विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) की बू देता था।

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